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अनिल मिश्रा पे लगा देशद्रोह का मुकदमा जानें पूरी खबरः

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यह स्पष्ट नहीं है कि अदालत या पुलिस ने वास्तविक में अनिल मिश्रा पर National Security Act (NSA) लगाया है। असल में NSA लगाने की मांग उठी थी — लेकिन यह लागू नहीं हुआ।

मध्य प्रदेश के ग्वालियर में Dr. भीमराव अंबेडकर की तस्वीर जलाने के आरोप में एक मामला सामने आया है। पुलिस ने इस मामले में एडवोकेट अनिल मिश्रा समेत कुछ लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है और कुछ को गिरफ्तार भी किया गया है। �

इस घटना को लेकर दलित संगठनों और भीम आर्मी सहित कई समूहों ने विरोध प्रदर्शन किया, कहा कि मामला गंभीर है और आरोपियों पर NSA लगाया जाना चाहिए। इसका तर्क यह है कि ऐसे कृत्य सामाजिक शांति भंग कर सकते हैं। �

सच्चाई:

अभी तक अनिल मिश्रा पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगा होने की कोई आधिकारिक सरकारी पुष्टि नहीं हुई है। जो खबरें आ रही हैं वह लोगों और संगठनों द्वारा “NSA लगाने” की मांग से जुड़ी हैं, न कि कानून वास्तव में लागू होने से

🧠 NSA (National Security Act) क्या है?

NSA भारत का एक जबरदस्त सुरक्षा कानून है जिसका प्रयोग आमतौर पर लंबे समय के लिए किसी व्यक्ति को रोकने/निरुद्ध रखने के लिए किया जाता है अगर वह राष्ट्रीय सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा माना जाता है। इस कानून को लागू करने के लिए सरकार औपचारिक आदेश जारी करती है। अभी तक ऐसा कोई आदेश इस मामले में जारी नहीं हुआ है। �

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❗क्या NSA वास्तव में लागू हुआ है?

❌ नहीं — अब तक की खबरों में यह स्पष्ट रूप से सरकार ने NSA लागू किया है ऐसा नहीं कहा गया। केवल प्रदर्शनकारियों और संगठनों ने मांग की है कि अनिल मिश्रा समेत आरोपियों पर NSA लगाना चाहिए। �

🧾 संक्षेप
अनिल मिश्रा गिरफ्तार हैं अंबेडकर की तस्वीर जलाने के आरोप में। �

दलित संगठनों ने NSA लगाने की मांग की है। �

अभी तक कोई आधिकारिक NSA लागू होने का आदेश नहीं आया है

डॉ. बी.आर. अंबेडकर की तस्वीर जलाने का मामला:
– ग्वालियर (मध्य प्रदेश) में 1 जनवरी 2026 को एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें डॉ. भीमराव अंबेडकर की तस्वीर जलाई गई और कथित अपमानजनक नारे लगाए गए। इसके आधार पर वकील *अनिल मिश्रा सहित कई लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई।

FIR और गिरफ्तारी:

पुलिस ने इस मामले में अनिल मिश्रा को गिरफ्तार किया, और मामला सार्वजनिक शांति भंग, सामाजिक वैमनस्य फैलाने आदि के तहत दर्ज हुआ।�
– बाद में हाई कोर्ट से उन्हें जमानत भी मिली है।

अनिल मिश्रा पे लगा देशद्रोह का मुकदमा जानें पूरी खबर

NSA लागू नहीं हुआ — सिर्फ मांग हुई
– मामला बढ़ने पर कई दलित संगठनों (जैसे भीम आर्मी, आज़ाद समाज पार्टी आदि) ने अनिल मिश्रा और अन्य पर NSA लगाने की मांग की। यह मांग इसलिए की गई कि उन्हें लगता है कि यह घटना जातीय और संवैधानिक भावना को भड़काने वाला है और गंभीर है
– लेकिन अभी तक राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) की कोई वास्तविक कार्रवाई या औपचारिक आरोप नहीं लगाया गया है।

👉 NSA ( National Security Act ) एक गंभीर कानून है जिसे तब लागू किया जाता है जब किसी व्यक्ति को राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक शांति या देश की एकता के लिए गंभीर खतरा माना जाता है — और यह कानून अक्सर मांग पर नहीं, सरकार/पुलिस के निर्णायक निर्णय पर लगाया जाता है।
अनिल मिश्रा पर NSA नहीं लगा है, बल्कि उनके खिलाफ विवादित कार्य (अंबेडकर की तस्वीर जलाना और उससे जुड़ी घटनाओं) के कारण दलित संगठनों ने NSA लगाने की मांग उठाई थी। वास्तविक में मामला अभी FIR और जमानत के स्तर पर है, NSA लागू नहीं हुआ है।

अनिल मिश्रा जेल से इसलिए बाहर आया क्योंकि हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी

अनिल मिश्रा पर क्यों NSA

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी को असंवैधानिक बताया — कोर्ट ने माना कि पुलिस ने गिरफ्तारी में कई procedural गलतियाँ की थीं। इसलिए उन्हें जमानत देने का आदेश दिया।

हाईकोर्ट ने उन्हें ₹1,00,000 के मुचलके (बॉन्ड) पर रिहा करने को कहा और उनके खिलाफ चल रही FIR को जारी रखते हुए उन्हें जेल से बाहर आने की अनुमति दी।

दालत ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए और फैसला दिया कि गिरफ्तारी में सही प्रक्रिया नहीं अपनाई गई, इसलिए जेल में रखना सही नहीं था

अनिल मिश्रा पर आरोप वाले मामले (डॉ. अंबेडकर का पोस्टर जलाने और नारेबाजी) में FIR जारी है और जांच चलेगी, लेकिन हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी है, इसलिए वे जेल से बाहर आ गए।

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